सितम-रसीदा हूँ मुझ पर वो इर्तिकाज़ करे
By abdullah-saqibJanuary 6, 2024
सितम-रसीदा हूँ मुझ पर वो इर्तिकाज़ करे
प-ए-विसाल मनाही का टुक जवाज़ करे
सियाह रात जुदाई का ज़ख़्म दे जाए
सरीर-ए-ख़ामा सदाओं से दिल-गुदाज़ करे
निगाह-ए-दिल को उसे देखने की जल्दी है
'अलत्तमाम न आए प नीम-बाज़ करे
उसे कहो न करे उन पे मुद्द'आ ज़ाहिर
उसे कहो कि रक़ीबों से एहतिराज़ करे
उसे कहो कि त'अल्लुक़ में मुख़्लिसी बरते
वफ़ा-सरिश्त-ओ-फ़रेबी में इम्तियाज़ करे
मिरी तलब तो बस इतनी है मोहतसिब साहिब
मिरी तरफ़ भी वो पल को निगाह-ए-नाज़ करे
प-ए-विसाल मनाही का टुक जवाज़ करे
सियाह रात जुदाई का ज़ख़्म दे जाए
सरीर-ए-ख़ामा सदाओं से दिल-गुदाज़ करे
निगाह-ए-दिल को उसे देखने की जल्दी है
'अलत्तमाम न आए प नीम-बाज़ करे
उसे कहो न करे उन पे मुद्द'आ ज़ाहिर
उसे कहो कि रक़ीबों से एहतिराज़ करे
उसे कहो कि त'अल्लुक़ में मुख़्लिसी बरते
वफ़ा-सरिश्त-ओ-फ़रेबी में इम्तियाज़ करे
मिरी तलब तो बस इतनी है मोहतसिब साहिब
मिरी तरफ़ भी वो पल को निगाह-ए-नाज़ करे
17973 viewsghazal • Hindi