सितारे आ गए ज़िक्र-ए-गुलाब ख़त्म हुआ
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
सितारे आ गए ज़िक्र-ए-गुलाब ख़त्म हुआ
किताब-ए-‘इश्क़ का इक और बाब ख़त्म हुआ
बहुत दिनों में जुनूँ ने मुक़ाबला जीता
बहुत दिनों में तिलिस्म-ए-किताब ख़त्म हुआ
ख़मोश रह के ज़रा उस ने फेर लीं नज़रें
मिरे सवाल का शायद जवाब ख़त्म हुआ
मिरी निगाह की वो धूम थी कि बस्ती में
इसी सबब से रिवाज-ए-नक़ाब ख़त्म हुआ
किसी ने कर दिया आने से दाइमी इंकार
बरस महीनों दिनों का हिसाब ख़त्म हुआ
टपक के मिल गई आँसू की बूँद मिट्टी में
हवा में शोर था इक और हबाब ख़त्म हुआ
बहुत उदास हैं तकमील-ए-इम्तिहाँ पर हम
कि सारा लुत्फ़-ए-सवाल-ओ-जवाब ख़त्म हुआ
किताब-ए-‘इश्क़ का इक और बाब ख़त्म हुआ
बहुत दिनों में जुनूँ ने मुक़ाबला जीता
बहुत दिनों में तिलिस्म-ए-किताब ख़त्म हुआ
ख़मोश रह के ज़रा उस ने फेर लीं नज़रें
मिरे सवाल का शायद जवाब ख़त्म हुआ
मिरी निगाह की वो धूम थी कि बस्ती में
इसी सबब से रिवाज-ए-नक़ाब ख़त्म हुआ
किसी ने कर दिया आने से दाइमी इंकार
बरस महीनों दिनों का हिसाब ख़त्म हुआ
टपक के मिल गई आँसू की बूँद मिट्टी में
हवा में शोर था इक और हबाब ख़त्म हुआ
बहुत उदास हैं तकमील-ए-इम्तिहाँ पर हम
कि सारा लुत्फ़-ए-सवाल-ओ-जवाब ख़त्म हुआ
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