सुख़नवर ग़म कुशादा कर रहे हैं
By mukesh-sharma-manmaujiJanuary 4, 2024
सुख़नवर ग़म कुशादा कर रहे हैं
पुराने ज़ख़्म ताज़ा कर रहे हैं
कोई समझाए अहल-ए-‘अक़्ल उन को
ग़मों को क्यों लबादा कर रहे हैं
मोहब्बत हो गई आसान शायद
नए लड़के ज़ियादा कर रहे हैं
उन्हें किस मुँह से मैं कह दूँ सितमगर
वो ये सब हस्ब-ए-वा’दा कर रहे हैं
पुराने ज़ख़्म ताज़ा कर रहे हैं
कोई समझाए अहल-ए-‘अक़्ल उन को
ग़मों को क्यों लबादा कर रहे हैं
मोहब्बत हो गई आसान शायद
नए लड़के ज़ियादा कर रहे हैं
उन्हें किस मुँह से मैं कह दूँ सितमगर
वो ये सब हस्ब-ए-वा’दा कर रहे हैं
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