सुकून मिलता है जब उलझी बात खुलती है
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
सुकून मिलता है जब उलझी बात खुलती है
मगर कभी कभी लफ़्ज़ों की ज़ात खुलती है
फिर इस के बा'द वो ख़ामोश रहने लगता है
किसी भी शख़्स पे जब काएनात खुलती है
तुम्हें ये 'इश्क़ बिछड़ कर समझ में आएगा
चराग़ बुझते हैं तब जा के रात खुलती है
हमीं ने पाँव में डाली हुई हैं ज़ंजीरें
वगरना रोज़ ही राह-ए-नजात खुलती है
किसी बुज़ुर्ग की चौखट किसी बदन की क़बा
ये बात सच है दु'आओं के साथ खुलती है
मगर कभी कभी लफ़्ज़ों की ज़ात खुलती है
फिर इस के बा'द वो ख़ामोश रहने लगता है
किसी भी शख़्स पे जब काएनात खुलती है
तुम्हें ये 'इश्क़ बिछड़ कर समझ में आएगा
चराग़ बुझते हैं तब जा के रात खुलती है
हमीं ने पाँव में डाली हुई हैं ज़ंजीरें
वगरना रोज़ ही राह-ए-नजात खुलती है
किसी बुज़ुर्ग की चौखट किसी बदन की क़बा
ये बात सच है दु'आओं के साथ खुलती है
85893 viewsghazal • Hindi