सुन रहा हूँ क़ुर्बतों में फ़ासला होने को है

By umair-ali-anjumJanuary 5, 2024
सुन रहा हूँ क़ुर्बतों में फ़ासला होने को है
इस क़दर तो हो गया अब और क्या होने को है
जाने क्यों आँखों में आँसू आ रहे हैं देर से
आज फिर शायद कोई मुझ से जुदा होने को है


शहर क्यों सुनसान है वीरान क्यों हैं रास्ते
हो चुका है हादिसा या हादिसा होने को है
हर तरफ़ ना'रे लगाए जा रहे हैं इंक़िलाब
ऐसा लगता है कि फिर महशर बपा होने को है


हर तरफ़ लाशें हैं 'अंजुम' हर गली है सोगवार
और क्या इस सरज़मीं पर कर्बला होने को है
11075 viewsghazalHindi