तमन्ना का बदन बिखरा पड़ा है

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
तमन्ना का बदन बिखरा पड़ा है
वो इक गुल-दान जो टूटा पड़ा है
तिरी आहट पे शायद चौंक उट्ठे
बहुत दिन से बदन गूँगा पड़ा है


जिसे दामन मयस्सर है वो रोए
यहाँ इक 'उम्र का सूखा पड़ा है
अभी पहचान बाक़ी है हमारी
अभी तक गाँव में हिस्सा पड़ा है


तुझे जल्दी है वापस लौटने की
त'अल्लुक़ का सिरा उलझा पड़ा है
जो चाहे माँग लो क़ीमत तुम अपनी
अभी किरदार पर पर्दा पड़ा है


68914 viewsghazalHindi