तिरे दर की हिमायत मिल गई है

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
तिरे दर की हिमायत मिल गई है
मुझे मेरी ज़रूरत मिल गई है
कहाँ पहुँचाएगी दुनिया को जाने
ज़िहानत में जो वहशत मिल गई है


बिछा जाता है बीमार-ए-मोहब्बत
तड़पने की इजाज़त मिल गई है
खनकती चूड़ियाँ देखी हैं जब से
समा'अत में बसीरत मिल गई है


मैं बाज़ी हारने वाला हूँ शायद
हिमायत में हिक़ारत मिल गई है
जिसे छू भी नहीं सकता है कोई
हमें उस की हिफ़ाज़त मिल गई है


ज़माना अब अलग कर के दिखाए
मोहब्बत में मोहब्बत मिल गई है
80329 viewsghazalHindi