तिरे दिमाग़ से सारा फ़ुतूर निकलेगा
By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
तिरे दिमाग़ से सारा फ़ुतूर निकलेगा
मिरी वफ़ा का नतीजा ज़रूर निकलेगा
न सर उठा के चलो पत्थरों की बस्ती में
लगेगी ठेस तो सारा ग़ुरूर निकलेगा
तू हौसले से अंधेरे का सामना करियो
इसी अंधेरे के पहलू से नूर निकलेगा
निज़ाम-ए-‘अद्ल तो मर'ऊब मुजरिमों से है
हमें यक़ीं है हमारा क़ुसूर निकलेगा
हैं चंद रोज़ की मेहमान उलझनें 'आलम'
तिरे सुकून का सूरज ज़रूर निकलेगा
मिरी वफ़ा का नतीजा ज़रूर निकलेगा
न सर उठा के चलो पत्थरों की बस्ती में
लगेगी ठेस तो सारा ग़ुरूर निकलेगा
तू हौसले से अंधेरे का सामना करियो
इसी अंधेरे के पहलू से नूर निकलेगा
निज़ाम-ए-‘अद्ल तो मर'ऊब मुजरिमों से है
हमें यक़ीं है हमारा क़ुसूर निकलेगा
हैं चंद रोज़ की मेहमान उलझनें 'आलम'
तिरे सुकून का सूरज ज़रूर निकलेगा
67873 viewsghazal • Hindi