तिरे ग़म की जब तक सुई चल रही है

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
तिरे ग़म की जब तक सुई चल रही है
मिरी ज़िंदगी की घड़ी चल रही है
वफ़ा के सफ़र में अकेला नहीं हूँ
मिरे साथ तेरी कमी चल रही है


बहुत फूल खिलते हैं आँखों में मेरी
अभी तक पुरानी नमी चल रही है
लतीफ़े सुना ऐ ग़ज़ल चुपके-चुपके
बराबर में संजीदगी चल रही है


धमक हो रही है ख़यालों की छत पर
बहुत ज़ोर से ख़ामुशी चल रही है
क़लम के फिसलने से डर लग रहा है
मोहब्बत अभी काग़ज़ी चल रही है


मैं आया था महफ़िल में 'उन्वान सुन कर
कहानी मगर दूसरी चल रही है
75218 viewsghazalHindi