तिरे हिज्र ने जो सितम किया कोई देखता
By umair-ali-anjumJanuary 5, 2024
तिरे हिज्र ने जो सितम किया कोई देखता
मिरी वहशतें मिरा रतजगा कोई देखता
किसी अध-खुले से किवाड़ में बड़े शौक़ से
कभी सुब्ह-दम कोई झाँकता कोई देखता
किसी दूसरे का वो हो गया मैं खड़ा रहा
मिरी बेबसी मिरा हौसला कोई देखता
कोई पालकी तो गुज़र गई थी 'उमैर' जी
मगर उस घड़ी मिरा देखना कोई देखता
मिरी वहशतें मिरा रतजगा कोई देखता
किसी अध-खुले से किवाड़ में बड़े शौक़ से
कभी सुब्ह-दम कोई झाँकता कोई देखता
किसी दूसरे का वो हो गया मैं खड़ा रहा
मिरी बेबसी मिरा हौसला कोई देखता
कोई पालकी तो गुज़र गई थी 'उमैर' जी
मगर उस घड़ी मिरा देखना कोई देखता
97741 viewsghazal • Hindi