तिरी आवाज़ धीमी हो रही है

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
तिरी आवाज़ धीमी हो रही है
कोई दीवार ऊँची हो रही है
ख़ुदा पर माथापच्ची हो रही है
उसी से हर तरक़्क़ी हो रही है


तिरी आँखें बताती हैं कहीं से
मिरी ताईद जारी हो रही है
वो होटल था वहाँ पर कौन कहता
सुनो जी चाय ठंडी हो रही है


बला की भीड़ है उस की गली में
तरफ़-दारों की गिनती हो रही है
हवा ख़ुश्बू उड़ा लाई है उस की
गुलों में छीना-झपटी हो रही है


गिरा है आँख में बस एक ज़र्रा
मगर तकलीफ़ कितनी हो रही है
फ़ज़ा अच्छी नहीं है बज़्म-ए-दिल की
ग़मों में काना-फूसी हो रही है


कोई चलता नहीं राह-ए-ख़ुदा पर
ज़बानी जी-हुज़ूरी हो रही है
37531 viewsghazalHindi