तिरी दुनिया में जब तक भी जिए हम
By bashir-farooqJanuary 2, 2024
तिरी दुनिया में जब तक भी जिए हम
फ़रेब-ए-आरज़ू खाया किए हम
अगर शर्त-ए-वफ़ा है बे-नियाज़ी
तो फिर ऐ जान-ए-महफ़िल जी लिए हम
परेशाँ अब्र की सूरत फिरे हैं
ग़ुबार-ए-कारवाँ बन कर जिए हम
इलाही ख़ैर हो जज़्ब-ओ-जुनूँ की
चले हैं शौक़ की दुनिया लिए हम
ये था ए'जाज़ चश्म-ए-पुर-फ़ुसूँ का
हुए मख़मूर अक्सर बिन पिए हम
बुझाते हैं चराग़-ए-आरज़ू वो
जलाते हैं मोहब्बत के दिये हम
शराब-ए-नाब पीने के लिए वो
मगर साक़ी तरसने के लिए हम
फ़रेब-ए-आरज़ू खाया किए हम
अगर शर्त-ए-वफ़ा है बे-नियाज़ी
तो फिर ऐ जान-ए-महफ़िल जी लिए हम
परेशाँ अब्र की सूरत फिरे हैं
ग़ुबार-ए-कारवाँ बन कर जिए हम
इलाही ख़ैर हो जज़्ब-ओ-जुनूँ की
चले हैं शौक़ की दुनिया लिए हम
ये था ए'जाज़ चश्म-ए-पुर-फ़ुसूँ का
हुए मख़मूर अक्सर बिन पिए हम
बुझाते हैं चराग़-ए-आरज़ू वो
जलाते हैं मोहब्बत के दिये हम
शराब-ए-नाब पीने के लिए वो
मगर साक़ी तरसने के लिए हम
32796 viewsghazal • Hindi