तिरी जब मेहरबाँ यादें हुई हैं
By chand-kakralviJanuary 19, 2024
तिरी जब मेहरबाँ यादें हुई हैं
बहुत ही ख़ुशनुमा रातें हुई हैं
हवाओं से बहुत डरने लगा हूँ
घनी जब से मिरी शाख़ें हुई हैं
वो जिस दिन से हुआ है दूर मुझ से
मिरी उस से बहुत बातें हुई हैं
उन्हीं पर जी रहे हैं हम अभी तक
जो ख़्वाबों में मुलाक़ातें हुई हैं
धुआँ निकला है तेरी खिड़कियों से
मगर पुर-नम मिरी आँखें हुई हैं
तिरी ख़ुशबू फ़ज़ा में घुल गई क्या
मो'अत्तर क्यों मिरी साँसें हुई हैं
बहुत ही ख़ुशनुमा रातें हुई हैं
हवाओं से बहुत डरने लगा हूँ
घनी जब से मिरी शाख़ें हुई हैं
वो जिस दिन से हुआ है दूर मुझ से
मिरी उस से बहुत बातें हुई हैं
उन्हीं पर जी रहे हैं हम अभी तक
जो ख़्वाबों में मुलाक़ातें हुई हैं
धुआँ निकला है तेरी खिड़कियों से
मगर पुर-नम मिरी आँखें हुई हैं
तिरी ख़ुशबू फ़ज़ा में घुल गई क्या
मो'अत्तर क्यों मिरी साँसें हुई हैं
39993 viewsghazal • Hindi