थकन से जिस्म मिरा जब भी टूट जाएगा

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
थकन से जिस्म मिरा जब भी टूट जाएगा
तिरा ख़याल मिरा हौसला बढ़ाएगा
रफ़ाक़तों का सफ़र देर तक नहीं रहता
किसी मक़ाम पे ये चाँद डूब जाएगा


ठहर गया मिरी आँखों में दर्द का मौसम
तिरा ख़याल मुझे जाने कब रुलाएगा
वो जिन के घर में किताबों को खा गई दीमक
उन्हें बताओ कहाँ से शु'ऊर आएगा


ये 'इश्क़ लाएगा उस मोड़ पर तुझे इक दिन
ग़ज़ल नहीं तो मिरा नाम गुनगुनाएगा
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