थे दिलासे झूट सब देते नहीं अब धीर ये

By rubalJanuary 4, 2024
थे दिलासे झूट सब देते नहीं अब धीर ये
हैं दु'आ दे कर के रोते अब मुझे सब पीर ये
तुम मुझे अब थाम लो मैं घुल रही हूँ राख सी
हैं डुबोने में लगे बहते हुए अब नीर ये


थी कभी ज़िंदा मगर अब एक ज़िंदा लाश हूँ
आज है बे-जान सी बे-रंग सी तस्वीर ये
अब किसी से है नहीं शिकवा मुझे जो ग़म मिला
बेवफ़ा थी जब मिरी अपनी बुरी तक़दीर ये


जान से जाना मुझे था 'इश्क़ का दस्तूर है
लो अकेली रह गई राँझे बिना फिर हीर ये
82293 viewsghazalHindi