तू कहता है तुझे मतलब नहीं था
By ishrat-sagheerOctober 27, 2023
तू कहता है तुझे मतलब नहीं था
वफ़ा का पास मुझ को कब नहीं था
ये तरका भाइयों में बाँटते तुम
तुम्हारे नाम सब का सब नहीं था
मियाँ रोने की मैं ने मश्क़ की थी
बहुत आसान ये कर्तब नहीं था
हमारी गुफ़्तुगू होती थी अक्सर
हमारे साथ वो जब जब नहीं था
तो क्या पहले की सारी लड़कियों को
ज़माने की रविश का ढब नहीं था
ये फैशन जो है अब ‘उर्यानियत का
नहीं था भाई मेरे तब नहीं था
फ़क़त सीखा है हम ने तजरबों से
हमारे वास्ते मकतब नहीं था
वो जिस के साथ कल मैं ने बहुत पी
वो मै-कश मेरा हम-मशरब नहीं था
खुलेगा राज़ ये आख़िर में 'इशरत'
ख़ुदा का कोई भी मज़हब नहीं था
वफ़ा का पास मुझ को कब नहीं था
ये तरका भाइयों में बाँटते तुम
तुम्हारे नाम सब का सब नहीं था
मियाँ रोने की मैं ने मश्क़ की थी
बहुत आसान ये कर्तब नहीं था
हमारी गुफ़्तुगू होती थी अक्सर
हमारे साथ वो जब जब नहीं था
तो क्या पहले की सारी लड़कियों को
ज़माने की रविश का ढब नहीं था
ये फैशन जो है अब ‘उर्यानियत का
नहीं था भाई मेरे तब नहीं था
फ़क़त सीखा है हम ने तजरबों से
हमारे वास्ते मकतब नहीं था
वो जिस के साथ कल मैं ने बहुत पी
वो मै-कश मेरा हम-मशरब नहीं था
खुलेगा राज़ ये आख़िर में 'इशरत'
ख़ुदा का कोई भी मज़हब नहीं था
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