तू मिरे सामने हँसता भी है रोता भी है
By umair-ali-anjumJanuary 5, 2024
तू मिरे सामने हँसता भी है रोता भी है
क्या तिरे दिल में कोई मेरे 'अलावा भी है
मेरा दिल तख़्त-ए-सुलैमान भी है मेरे लिए
बा'ज़ लोगों के लिए एक खिलौना भी है
तर्क-ए-उल्फ़त से भी बंजर न हुई दिल की ज़मीं
हिज्र तेरा मिरी आँखों से छलकता भी है
मैं ने बख़्शा था तुझे ज़ो'म हसीं होने का
थोड़ा सा हक़ तो तिरे हुस्न पे मेरा भी है
हिज्र और वस्ल के दोराहे पे मौजूद हूँ मैं
पूछना ये था कोई तीसरा रस्ता भी है
रोज़ कुछ फूल दरीचे में धरे मिलते हैं
क्या 'उमैर' अपना कोई चाहने वाला भी है
क्या तिरे दिल में कोई मेरे 'अलावा भी है
मेरा दिल तख़्त-ए-सुलैमान भी है मेरे लिए
बा'ज़ लोगों के लिए एक खिलौना भी है
तर्क-ए-उल्फ़त से भी बंजर न हुई दिल की ज़मीं
हिज्र तेरा मिरी आँखों से छलकता भी है
मैं ने बख़्शा था तुझे ज़ो'म हसीं होने का
थोड़ा सा हक़ तो तिरे हुस्न पे मेरा भी है
हिज्र और वस्ल के दोराहे पे मौजूद हूँ मैं
पूछना ये था कोई तीसरा रस्ता भी है
रोज़ कुछ फूल दरीचे में धरे मिलते हैं
क्या 'उमैर' अपना कोई चाहने वाला भी है
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