तुम हमारे क़रीब आने को
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
तुम हमारे क़रीब आने को
करते रहते हो ख़ुश ज़माने को
उस के कूचे का फ़र्श पक्का है
हाथ मलता हूँ ख़ाक उड़ाने को
चलना फिरना कोई ज़रूरी नहीं
उस की महफ़िल में आने जाने को
जब कि मैं ने समझना छोड़ दिया
वो तुला है समझ में आने को
उसे कैसे भुलाए कोई जिसे
याद करना पड़े भुलाने को
तुम तो सब कुछ बताए देते हो
कुछ बचा कर रखो छुपाने को
उस ने कुछ देर सुन लिया वर्ना
कौन सुनता मिरे फ़साने को
तेरी मौजूदगी में कम से कम
जी तो करता है मुस्कुराने को
करते रहते हो ख़ुश ज़माने को
उस के कूचे का फ़र्श पक्का है
हाथ मलता हूँ ख़ाक उड़ाने को
चलना फिरना कोई ज़रूरी नहीं
उस की महफ़िल में आने जाने को
जब कि मैं ने समझना छोड़ दिया
वो तुला है समझ में आने को
उसे कैसे भुलाए कोई जिसे
याद करना पड़े भुलाने को
तुम तो सब कुछ बताए देते हो
कुछ बचा कर रखो छुपाने को
उस ने कुछ देर सुन लिया वर्ना
कौन सुनता मिरे फ़साने को
तेरी मौजूदगी में कम से कम
जी तो करता है मुस्कुराने को
52435 viewsghazal • Hindi