तुम्हारे बा'द भी ये तौर इख़्तियार किया

By ahmar-nadeemFebruary 5, 2024
तुम्हारे बा'द भी ये तौर इख़्तियार किया
वफ़ा ख़ुलूस-ओ-मोहब्बत पे ए'तिबार किया
हमारे नाम से जलते थे चंद दीवाने
हमारे नाम की शोहरत ने आश्कार किया


मैं जानता था कि माज़ी में शोर बरपा है
कुछ इस लिए भी सदाओं को दरकिनार किया
हम ऐसे बख़्त के मारे कि शहर में आ कर
लिबास-ए-गर्दिश-ए-दौराँ भी तार-तार किया


ये किस उमीद पे दामन की धज्जियाँ करके
तमाम 'उम्र रफ़ूगर का इंतिज़ार किया
जहान-ए-शौक़ ने महदूद कर दिया था मगर
दयार-ए-शे’र ने वुस'अत से हम-किनार किया


74014 viewsghazalHindi