तुम्हारे बारे में मुझ से सवाल करते हुए
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
तुम्हारे बारे में मुझ से सवाल करते हुए
गुज़र न जाए ये रुत भी मलाल करते हुए
पुराने ज़ख़्म कहीं फिर न मुस्कुरा उट्ठें
मैं डर रहा हूँ त'अल्लुक़ बहाल करते हुए
किसी ने रात की सरगोशियाँ सुनी ही नहीं
चराग़ बुझ गए सब 'अर्ज़-ए-हाल करते हुए
बता गए हैं किसी को तड़प मिरे दिल की
फ़ना हुए हैं ये आँसू कमाल करते हुए
मुझे सफ़र की दु'आओं के हार पहना कर
पलट गया कोई आँखें निढाल करते हुए
गुज़र न जाए ये रुत भी मलाल करते हुए
पुराने ज़ख़्म कहीं फिर न मुस्कुरा उट्ठें
मैं डर रहा हूँ त'अल्लुक़ बहाल करते हुए
किसी ने रात की सरगोशियाँ सुनी ही नहीं
चराग़ बुझ गए सब 'अर्ज़-ए-हाल करते हुए
बता गए हैं किसी को तड़प मिरे दिल की
फ़ना हुए हैं ये आँसू कमाल करते हुए
मुझे सफ़र की दु'आओं के हार पहना कर
पलट गया कोई आँखें निढाल करते हुए
49161 viewsghazal • Hindi