टूटा हुआ है लाख सफ़र की थकान से

By syed-waseem-naqviJanuary 5, 2024
टूटा हुआ है लाख सफ़र की थकान से
सहरा-नवर्द कैसे कहे आसमान से
दीवार-ओ-दर से आगे भी दुनिया है इक मिरी
इक शख़्स कह रहा था ये अपने मकान से


होश-ओ-हवास साथ ही देते नहीं मिरा
मेहमान एक जब से गया है मकान से
ले आया है जो हिज्र की दहलीज़ पर मुझे
निकलेगा कैसे शख़्स वो मेरे गुमान से


हम को तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की 'आदत भी यूँ पड़ी
लगने लगी है आँच हमें साएबान से
सय्याद ने हवा में लगाया है ऐसा जाल
डरने लगे हैं सारे परिंदे उड़ान से


बस गहरी नींद हम को सुलाना न ज़िंदगी
कब हम ने हार मानी किसी इम्तिहान से
इस फ़िल्म में भी कोई मज़ा अब नहीं रहा
जब से वो शख़्स रूठा है इस दास्तान से


34083 viewsghazalHindi