उदास रहने का कोई बहाना चाहता हूँ
By rohit-gaur-ruuhJanuary 4, 2024
उदास रहने का कोई बहाना चाहता हूँ
वो लुत्फ़ ग़म के तिरे फिर से पाना चाहता हूँ
सुना है झूट नहीं बोलती हैं ये नज़रें
इसी लिए मैं ये नज़रें मिलाना चाहता हूँ
नज़र नज़र में ही होता तमाम है क़िस्सा
वो जब भी देखे मैं नज़रें चुराना चाहता हूँ
कभी किसी को बताया नहीं जताया नहीं
तुझे ही क्यों वो बताना जताना चाहता हूँ
लिखा हुआ है तिरा नाम मेरी रग रग पर
लहू बहा के मैं इस को मिटाना चाहता हूँ
वो लुत्फ़ ग़म के तिरे फिर से पाना चाहता हूँ
सुना है झूट नहीं बोलती हैं ये नज़रें
इसी लिए मैं ये नज़रें मिलाना चाहता हूँ
नज़र नज़र में ही होता तमाम है क़िस्सा
वो जब भी देखे मैं नज़रें चुराना चाहता हूँ
कभी किसी को बताया नहीं जताया नहीं
तुझे ही क्यों वो बताना जताना चाहता हूँ
लिखा हुआ है तिरा नाम मेरी रग रग पर
लहू बहा के मैं इस को मिटाना चाहता हूँ
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