उलझी हुई लकीरों का ये जाल देख कर
By aftab-shahFebruary 23, 2025
उलझी हुई लकीरों का ये जाल देख कर
'आमिल भी रो पड़ा है मिरी फ़ाल देख कर
ऐसी लकीर जिस पे तिरा नाम था लिखा
वो मिट गई है वक़्त की ये चाल देख कर
लालच के मुँह में हिर्स का पानी सा आ गया
ग़ुर्बत की बस्तियों में पड़ा काल देख कर
हाकिम की बाछें खिल गईं आँखों के साथ साथ
कर्ज़ों की मद में आया हुआ माल देख कर
आँखों की खिड़कियों से तका चाँद को बहुत
हम ने मनाई 'ईद तिरा गाल देख कर
होंटों की सिसकियों ने छुआ होंट को मगर
साँसों की चीख़ दब गई वो ख़ाल देख कर
दिन ने तिरे वुजूद से रौशन किया जहाँ
उतरी न शब में रात तिरे बाल देख कर
दिन भर पुकारता हूँ तिरा नाम लेता हूँ
आएगा तुझ को रहम मिरा हाल देख कर
'आमिल भी रो पड़ा है मिरी फ़ाल देख कर
ऐसी लकीर जिस पे तिरा नाम था लिखा
वो मिट गई है वक़्त की ये चाल देख कर
लालच के मुँह में हिर्स का पानी सा आ गया
ग़ुर्बत की बस्तियों में पड़ा काल देख कर
हाकिम की बाछें खिल गईं आँखों के साथ साथ
कर्ज़ों की मद में आया हुआ माल देख कर
आँखों की खिड़कियों से तका चाँद को बहुत
हम ने मनाई 'ईद तिरा गाल देख कर
होंटों की सिसकियों ने छुआ होंट को मगर
साँसों की चीख़ दब गई वो ख़ाल देख कर
दिन ने तिरे वुजूद से रौशन किया जहाँ
उतरी न शब में रात तिरे बाल देख कर
दिन भर पुकारता हूँ तिरा नाम लेता हूँ
आएगा तुझ को रहम मिरा हाल देख कर
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