उमीदों से दिल-ए-बर्बाद को आबाद करता हूँ
By hari-chand-akhtarJanuary 3, 2024
उमीदों से दिल-ए-बर्बाद को आबाद करता हूँ
मिटाने के लिए दुनिया नई ईजाद करता हूँ
तिरी मी’आद-ए-ग़म पूरी हुई ऐ ज़िंदगी ख़ुश हो
क़फ़स टूटे न टूटे मैं तुझे आज़ाद करता हूँ
जफ़ा-कारो मिरी मज़लूम ख़ामोशी पे हँसते हो
ज़रा ठहरो ज़रा दम लो अभी फ़रियाद करता हूँ
मैं अपने दिल का मालिक हूँ मिरा दिल एक बस्ती है
कभी आबाद करता हूँ कभी बर्बाद करता हूँ
मुलाक़ातें भी होती हैं मुलाक़ातों के बा'द अक्सर
वो मुझ को भूल जाते हैं मैं उन को याद करता हूँ
ख़ुदी की इब्तिदा ये थी कि अपने-आप में गुम था
ख़ुदी की इंतिहा ये है ख़ुदा को याद करता हूँ
बुतों के 'इश्क़ में खोया गया हूँ वर्ना ऐ 'अख़्तर'
ख़ुदा शाहिद है मैं अक्सर ख़ुदा को याद करता हूँ
मिटाने के लिए दुनिया नई ईजाद करता हूँ
तिरी मी’आद-ए-ग़म पूरी हुई ऐ ज़िंदगी ख़ुश हो
क़फ़स टूटे न टूटे मैं तुझे आज़ाद करता हूँ
जफ़ा-कारो मिरी मज़लूम ख़ामोशी पे हँसते हो
ज़रा ठहरो ज़रा दम लो अभी फ़रियाद करता हूँ
मैं अपने दिल का मालिक हूँ मिरा दिल एक बस्ती है
कभी आबाद करता हूँ कभी बर्बाद करता हूँ
मुलाक़ातें भी होती हैं मुलाक़ातों के बा'द अक्सर
वो मुझ को भूल जाते हैं मैं उन को याद करता हूँ
ख़ुदी की इब्तिदा ये थी कि अपने-आप में गुम था
ख़ुदी की इंतिहा ये है ख़ुदा को याद करता हूँ
बुतों के 'इश्क़ में खोया गया हूँ वर्ना ऐ 'अख़्तर'
ख़ुदा शाहिद है मैं अक्सर ख़ुदा को याद करता हूँ
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