उन आँखों में 'अक्स कभी तू अपना देख न पाएगा
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
उन आँखों में 'अक्स कभी तू अपना देख न पाएगा
इस हसरत में ऐ दिल इक दिन पत्थर का हो जाएगा
शहज़ादों की प्रेम-कहानी अफ़्साना बन जाती है
तेरी मेरी बातें पगली कौन यहाँ दोहराएगा
अपनी महफ़िल जमती है अब शहर के कॉफ़ी हाउस में
गाओं की चौपाल पे आ कर कौन अलाव लगाएगा
'इश्क़ नगर में रहने के आदाब ज़रूरी होते हैं
पहले तुम को ख़ामोशी का राग सुनाया जाएगा
इतना भी बेकार न समझो याद-ए-माज़ी को 'नादिर'
ये तिनका ही एक न इक दिन दरिया पार कराएगा
इस हसरत में ऐ दिल इक दिन पत्थर का हो जाएगा
शहज़ादों की प्रेम-कहानी अफ़्साना बन जाती है
तेरी मेरी बातें पगली कौन यहाँ दोहराएगा
अपनी महफ़िल जमती है अब शहर के कॉफ़ी हाउस में
गाओं की चौपाल पे आ कर कौन अलाव लगाएगा
'इश्क़ नगर में रहने के आदाब ज़रूरी होते हैं
पहले तुम को ख़ामोशी का राग सुनाया जाएगा
इतना भी बेकार न समझो याद-ए-माज़ी को 'नादिर'
ये तिनका ही एक न इक दिन दरिया पार कराएगा
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