उँगलियाँ ख़ुद पे उठाओ तो कोई बात बने

By shyam-vashishtha-shahidJanuary 5, 2024
उँगलियाँ ख़ुद पे उठाओ तो कोई बात बने
आइना सामने लाओ तो कोई बात बने
आज हम चाँद सितारों के परे जा पहुँचे
ख़ुद को अब ढूँड के लाओ तो कोई बात बने


अपनी 'उम्रों से बड़े हो गए बच्चे यारो
इन के बचपन को बचाओ तो कोई बात बने
तुम मुझे भूल चुके हो तो कोई बात नहीं
तुम मुझे याद न आओ तो कोई बात बने


इन मकानों की क़तारों को ज़रा देखो तो
इन में घर एक दिखाओ तो कोई बात बने
ईंट-पत्थर के ये जंगल नहीं देंगे साँसें
रोज़ कुछ पेड़ लगाओ तो कोई बात बने


बुद्ध होने के लिए भागना घर से है ग़लत
दिल न अपनों का दुखाओ तो कोई बात बने
ख़ुद-कुशी तो कभी अच्छी नहीं हो सकती है
ज़िंदगी जी के दिखाओ तो कोई बात बने


24365 viewsghazalHindi