उस की खिड़की से रौशनी आई

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
उस की खिड़की से रौशनी आई
शह्र में फिर से ज़िंदगी आई
जब ख़यालात हो गए बूढ़े
तब मोहब्बत पे कम-सिनी आई


वो न बोला तो आज कानों में
जो सदा आई अजनबी आई
बाक़ी सब शह्र हो गया ग़ाएब
सामने जब तिरी गली आई


मुझ को आया न हाथ फैलाना
मेरे हिस्से में शा'इरी आई
इस लिए भी कराहता हूँ मैं
कोई आवाज़ दे अभी आई


गर हवा आई भी शब-ए-फ़ुर्क़त
तो चराग़ों को ढूँढती आई
54814 viewsghazalHindi