उसी रस्ते से गुज़रें और परखें हम निशाँ अपना

By sanjay-bhatJanuary 4, 2024
उसी रस्ते से गुज़रें और परखें हम निशाँ अपना
चलो देखें है अब भी क्या किसी लब पर बयाँ अपना
जिसे दिल से बनाया था बड़े अरमान से हम ने
हमारा रास्ता तकता है क्या अब भी मकाँ अपना


वो कहते हो जिसे तुम दश्त इक वीरान सा कोई
कभी था वो तो फूलों से भरा सारा जहाँ अपना
हैं हम ही हम तो दुनिया में नहीं है और अब कोई
न जाने कैसे टूटेगा अना का ये गुमाँ अपना


फ़रिश्तो इस चमन को तुम सँवारो अपने हाथों से
नहीं है रंग फूलों में न कोई बाग़बाँ अपना
17766 viewsghazalHindi