उसी तरह हमें ज़िक्र-ए-ख़ुदा ज़रूरी है

By muskan-syed-riazJanuary 4, 2024
उसी तरह हमें ज़िक्र-ए-ख़ुदा ज़रूरी है
कि जैसे जिस्म को अच्छी ग़िज़ा ज़रूरी है
कुछ ऐसे खोए तिरी ज़ात में कि भूल गए
निभाना ख़ुद से भी अह्द-ए-वफ़ा ज़रूरी है


है अच्छी बात तबीअत में इंकिसार भी हो
मगर मिज़ाज में थोड़ी अना ज़रूरी है
मिरे तबीब ने मुझ को दवा तो दी है ज़रूर
शिफ़ा के वास्ते लेकिन दुआ ज़रूरी है


है मंज़िलों पे पहुँचने की जुस्तुजू तो हमें
तुम्हारे जैसा कोई नक़्श-ए-पा ज़रूरी है
53151 viewsghazalHindi