उतरा है आसमाँ से फ़रिश्ता ज़मीन पर

By hiralal-yadav-hiraJanuary 3, 2024
उतरा है आसमाँ से फ़रिश्ता ज़मीन पर
बिखरा है उस के नूर का जल्वा ज़मीन पर
खाते फिरेंगे आप भी धोका ज़मीन पर
देखें न आसमान का सपना ज़मीन पर


मिलता जो सब को एक सा मौक़ा ज़मीन पर
सोता न कोई आदमी भूका ज़मीन पर
देखो जहाँ वहीं पे है मेला ज़मीन पर
फिर भी हर एक शख़्स है तन्हा ज़मीन पर


आबाद हर तरह से रहें है दु'आ यही
जिन से जुड़ा है प्यार का रिश्ता ज़मीन पर
अब तो रिहाई दे दे ग़म-ए-ज़िंदगी कि मैं
उक्ता चुका हूँ बन के तमाशा ज़मीन पर


मेहमान चंद रोज़ के सब लोग हैं यहाँ
क़ाएम नहीं है कोई भी बंदा ज़मीन पर
45391 viewsghazalHindi