उतरी है बे-मिसाल उसी के बदन में ठण्ड
By mohammad-yasir-mustafviJanuary 4, 2024
उतरी है बे-मिसाल उसी के बदन में ठण्ड
जिस के कभी न पड़ती थी शे'र-ओ-सुख़न में ठण्ड
देखोगे ग़ौर से तो समझ आएगी तुम्हें
पड़ने लगी तुम्हारी अब इस अंजुमन में ठण्ड
ता-'उम्र वो मिशन भी अधूरा रहेगा जब
पड़ जाएगी ज़रा सी किसी भी मिशन में ठण्ड
इस ख़ुश-ख़िराम जिस्म-ए-मुबारक के लम्स से
यक-लख़्त ही उतर गई पूरे बदन में ठण्ड
इक 'उम्र तक बना रहा मैं घर का साएबाँ
तब जा के आज मुझ को मिली है कफ़न में ठण्ड
परदेस की तपिश में मिरा जी मचल गया
जब सुन लिया कि पड़ने लगी है वतन में ठण्ड
जिस के कभी न पड़ती थी शे'र-ओ-सुख़न में ठण्ड
देखोगे ग़ौर से तो समझ आएगी तुम्हें
पड़ने लगी तुम्हारी अब इस अंजुमन में ठण्ड
ता-'उम्र वो मिशन भी अधूरा रहेगा जब
पड़ जाएगी ज़रा सी किसी भी मिशन में ठण्ड
इस ख़ुश-ख़िराम जिस्म-ए-मुबारक के लम्स से
यक-लख़्त ही उतर गई पूरे बदन में ठण्ड
इक 'उम्र तक बना रहा मैं घर का साएबाँ
तब जा के आज मुझ को मिली है कफ़न में ठण्ड
परदेस की तपिश में मिरा जी मचल गया
जब सुन लिया कि पड़ने लगी है वतन में ठण्ड
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