वफ़ा में पेच ऐसा पड़ गया
By fahmi-badayuniFebruary 6, 2024
वफ़ा में पेच ऐसा पड़ गया
सितम सहने का चस्का पड़ गया
मु'आफ़ी माँगने वाला था वो
मुझे ग़ुस्से में हँसना पड़ गया
बजाए रोने के मैं हँस पड़ा
ग़मों का दाँव उल्टा पड़ गया
दवा तो हिज्र की महँगी न थी
मगर परहेज़ महँगा पड़ गया
मुझे देखो मैं संग-ए-मील था
मगर रस्ते से हटना पड़ गया
कभी सुलझाई जो उलझन कोई
नया एक और फंदा पड़ गया
सफ़र के पेच-ओ-ख़म याद आ गए
मुझे घर में भटकना पड़ गया
सितम सहने का चस्का पड़ गया
मु'आफ़ी माँगने वाला था वो
मुझे ग़ुस्से में हँसना पड़ गया
बजाए रोने के मैं हँस पड़ा
ग़मों का दाँव उल्टा पड़ गया
दवा तो हिज्र की महँगी न थी
मगर परहेज़ महँगा पड़ गया
मुझे देखो मैं संग-ए-मील था
मगर रस्ते से हटना पड़ गया
कभी सुलझाई जो उलझन कोई
नया एक और फंदा पड़ गया
सफ़र के पेच-ओ-ख़म याद आ गए
मुझे घर में भटकना पड़ गया
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