वही हों प्यार की रातें वही हों प्यार के दिन

By ishrat-jahangirpuriJanuary 3, 2024
वही हों प्यार की रातें वही हों प्यार के दिन
मिरे नसीब से पलटें जो फिर बहार के दिन
ये हम से पूछो कि कैसे गुज़ारते हैं ग़रीब
फ़िराक़-ए-यार की रातें तलाश-ए-यार के दिन


ग़ुरूर-ओ-नाज़ की रातें उन्हें मुबारक हों
फिरेंगे क्या न कभी मेरे इंकिसार के दिन
तसव्वुर-ए-शब-ए-वा'दा 'अजब क़यामत है
ये माना सख़्त गुज़रते हैं इंतिज़ार के दिन


ख़िज़ाँ-नसीबों पे यूँ हँस रहे हैं अहल-ए-तरब
चमन में जैसे न आएँगे फिर बहार के दिन
तबाहियों पे मिरी मुस्कुरा न ऐ ज़ालिम
न रह सकेंगे हमेशा तिरे वक़ार के दिन


ये माना आज जफ़ा-जू को नाज़ है 'इशरत'
कभी तो आएँगे मेरे भी इख़्तियार के दिन
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