वो जो कासा लिए हर दर पे खड़ा होता है

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
वो जो कासा लिए हर दर पे खड़ा होता है
मैं उसे रोज़ बताता हूँ ख़ुदा होता है
कितने दरवाज़ों पे झुकता है तुम्हें क्या मा'लूम
वो जो इक शख़्स किसी घर का बड़ा होता है


वक़्त पर काम न आ पाए तो भाई कैसा
घर में रक्खी हुई तलवार से क्या होता है
उस ने ता'रीफ़ के पत्थर से किया है ज़ख़्मी
ये निशाना बड़ी मुश्किल से ख़ता होता है


'इश्क़ में सर कभी झुकता ही नहीं है 'नादिर'
ये वो सज्दा है जो आँखों से अदा होता है
61864 viewsghazalHindi