वो कहाँ है किताब के अन्दर
By fahmi-badayuniFebruary 6, 2024
वो कहाँ है किताब के अन्दर
जो लिखा था निसाब के अन्दर
मैं ने ढूँडा शराब के अन्दर
और नशा था नक़ाब के अन्दर
आज भाई का फ़ोन आ ही गया
कुछ कमी थी हिसाब के अन्दर
सारा अफ़्साना रंग-ओ-बू का था
कुछ न निकला गुलाब के अन्दर
अपने अपने सवाल होते हैं
अपने अपने जवाब के अन्दर
मेरी दीवानगी पे इक बुढ़िया
हँस पड़ी माहताब के अन्दर
घूमना छोड़ दे ज़मीन अगर
गिर पड़े आफ़्ताब के अन्दर
जो लिखा था निसाब के अन्दर
मैं ने ढूँडा शराब के अन्दर
और नशा था नक़ाब के अन्दर
आज भाई का फ़ोन आ ही गया
कुछ कमी थी हिसाब के अन्दर
सारा अफ़्साना रंग-ओ-बू का था
कुछ न निकला गुलाब के अन्दर
अपने अपने सवाल होते हैं
अपने अपने जवाब के अन्दर
मेरी दीवानगी पे इक बुढ़िया
हँस पड़ी माहताब के अन्दर
घूमना छोड़ दे ज़मीन अगर
गिर पड़े आफ़्ताब के अन्दर
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