वो क्या बुनेगा कोई ख़्वाब सल्तनत के लिए
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
वो क्या बुनेगा कोई ख़्वाब सल्तनत के लिए
तरस रहा हो जो मुद्दत से एक छत के लिए
लहू में डूबे हैं काग़ज़ क़लम दवात इधर
तरस रहे हैं उधर लोग ख़ैरियत के लिए
किसी को साज़िशें करने की क्या ज़रूरत है
मिरा मिज़ाज है मेरी मुख़ालिफ़त के लिए
किसी बुज़ुर्ग की सोहबत में बैठना उठना
बहुत ज़रूरी है ये अच्छी तर्बियत के लिए
ऐ ज़िंदगी ये सितम है कि तेरे होते हुए
ज़माना आने लगा मेरी ता'ज़ियत के लिए
तरस रहा हो जो मुद्दत से एक छत के लिए
लहू में डूबे हैं काग़ज़ क़लम दवात इधर
तरस रहे हैं उधर लोग ख़ैरियत के लिए
किसी को साज़िशें करने की क्या ज़रूरत है
मिरा मिज़ाज है मेरी मुख़ालिफ़त के लिए
किसी बुज़ुर्ग की सोहबत में बैठना उठना
बहुत ज़रूरी है ये अच्छी तर्बियत के लिए
ऐ ज़िंदगी ये सितम है कि तेरे होते हुए
ज़माना आने लगा मेरी ता'ज़ियत के लिए
93994 viewsghazal • Hindi