वो सब से पहले मिरा ज़र्फ़ आज़मा के मिला
By shad-nimbahediJanuary 5, 2024
वो सब से पहले मिरा ज़र्फ़ आज़मा के मिला
फिर इस के बा'द मिला तो नज़र झुका के मिला
उसे भी अपने ही जैसा बना दिया उस ने
वो एक क़तरा समुंदर से जो कि जा के मिला
ग़ुबार-ए-वक़्त की तह जम गई थी चेहरे पर
वो आते जाते मिला जब भी मुँह छुपा के मिला
जिसे बुझाने की कोशिश में था ज़माना वो
चराग़ जलता हुआ दोष पे हवा के मिला
वो दर्द बन के मिरे दिल में 'शाद' रहता है
जो एक बार भी मुझ से न मुस्कुरा के मिला
फिर इस के बा'द मिला तो नज़र झुका के मिला
उसे भी अपने ही जैसा बना दिया उस ने
वो एक क़तरा समुंदर से जो कि जा के मिला
ग़ुबार-ए-वक़्त की तह जम गई थी चेहरे पर
वो आते जाते मिला जब भी मुँह छुपा के मिला
जिसे बुझाने की कोशिश में था ज़माना वो
चराग़ जलता हुआ दोष पे हवा के मिला
वो दर्द बन के मिरे दिल में 'शाद' रहता है
जो एक बार भी मुझ से न मुस्कुरा के मिला
83381 viewsghazal • Hindi