वो तो हश्र था मगर उस की अब वो शबाहतें भी चली गईं

By r-p-shokhFebruary 1, 2024
वो तो हश्र था मगर उस की अब वो शबाहतें भी चली गईं
जो रहें तो शहर में क्या रहें कि क़यामतें भी चली गईं
तिरे दम से थीं सभी रौनक़ें वो हबीब थे कि रक़ीब थे
वो क़राबतें तो गई ही थीं वो रिक़ाबतें भी चली गईं


तिरा क़ुर्ब गरचे था जाँ-गुसिल वही क़ुर्ब था मिरी ज़िंदगी
तिरे बा'द मर्ग-ओ-हयात की वो रिफाक़तें भी चली गईं
मिरी आरज़ू थी कि जाँ-ब-कफ़ मिरी जुस्तुजू कि नफ़स ब-पा
अब ऐ ज़िंदगी मुझे छोड़ जा कि ये हालतें भी चली गईं


तू ने दी जो दर्द की दौलतें वो ग़ज़ल ग़ज़ल न समा सकीं
मिरे हाथ से तिरे हुस्न की ये विरासतें भी चली गईं
उसे देख देख के सोचना उसे सोच सोच के देखना
वो अज़ीज़ क्या कि अज़ीज़-तर कई आदतें भी चली गईं


39855 viewsghazalHindi