ये अलग बात कि फ़ुर्सत भी नहीं मिलती है

By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
ये अलग बात कि फ़ुर्सत भी नहीं मिलती है
ख़ुद से मिल कर हमें राहत भी नहीं मिलती है
हम तो करना भी नहीं चाहते दिल का सौदा
और मुनासिब हमें क़ीमत भी नहीं मिलती है


'इश्क़ वो जुर्म है इस जुर्म को करने वालो
इस के मुजरिम को ज़मानत भी नहीं मिलती है
दौड़ते भी नहीं शोहरत के हम आगे पीछे
और आसानी से शोहरत भी नहीं मिलती है


हर जगह लोग मोहज़्ज़ब भी नहीं होते हैं
हर जगह दोस्तो 'इज़्ज़त भी नहीं मिलती है
हम ने माना कि बुरे आप नहीं हैं लेकिन
आप में कोई शराफ़त भी नहीं मिलती है


ऐश बेटे की कमाई से बहू करती है
माँ को अब दूध की उजरत भी नहीं मिलती है
हर किसी से नहीं रखता हूँ मैं रिश्ता 'आलम'
हर किसी से ये तबी'अत भी नहीं मिलती है


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