ये दवा उस ने लिखी है मिरी बेज़ारी की
By shahbaz-talibJanuary 5, 2024
ये दवा उस ने लिखी है मिरी बेज़ारी की
'इश्क़ ही आख़िरी ख़ुराक है बीमारी की
रेगज़ारों की हथेली पे भी गुल-कारी की
दश्त में हिज्र नहीं वस्ल की तय्यारी की
राख होते हुए जंगल ने बताया आख़िर
अहमियत क्या है सुलगती हुई चिंगारी की
जिस ने सर अपना निकाला हुआ पत्थर का शिकार
तुम ने खिड़की नहीं खोली ये समझदारी की
'इश्क़ ही आख़िरी ख़ुराक है बीमारी की
रेगज़ारों की हथेली पे भी गुल-कारी की
दश्त में हिज्र नहीं वस्ल की तय्यारी की
राख होते हुए जंगल ने बताया आख़िर
अहमियत क्या है सुलगती हुई चिंगारी की
जिस ने सर अपना निकाला हुआ पत्थर का शिकार
तुम ने खिड़की नहीं खोली ये समझदारी की
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