ये कौन है जो कानों में रस घोल रहा है

By faisal-qadri-gunnauriJanuary 2, 2024
ये कौन है जो कानों में रस घोल रहा है
कोयल की तरह मीठा बहुत बोल रहा है
दौलत से मोहब्बत को मिरी तोल रहा है
वो शख़्स जो मेरे लिए अनमोल रहा है


क्या पाने की रक्खेगा कोई तुझ से तवक़्क़ो'
हाथों में हमेशा तिरे कश्कोल रहा है
सब अच्छी तरह से तुझे पहचान गए हैं
अब तक जो ये चेहरे पे तिरे ख़ोल रहा है


क्या भूल गया है तू अभी पर नहीं मेरे
सय्याद अभी क्यों ये क़फ़स खोल रहा है
ला-‘इल्म भी कर लेते थे अश'आर को मौज़ूँ
'फ़ैसल' ये मिरे शहर का माहौल रहा है


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