ये क्या कि फूल बनो एक ही के साथ रहो

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
ये क्या कि फूल बनो एक ही के साथ रहो
महक की तरह जियो और सभी के साथ रहो
लहू पिलाना पड़ेगा तुम्हें ज़रूरत पर
ये हौसला है तो फिर रौशनी के साथ रहो


अगर शु'ऊर न हो प्यास बुझ नहीं सकती
तमाम 'उम्र भले ही नदी के साथ रहो
ये ज़िंदगी भी 'अजब इम्तिहान लेती है
जिसे मिज़ाज न चाहे उसी के साथ रहो


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