ये मिरी ज़िंदगी किसी की है

By parvez-shaikhJanuary 4, 2024
ये मिरी ज़िंदगी किसी की है
फ़िक्र मत कीजे आप ही की है
जो ख़फ़ा है उसे मनाना है
इस लिए हम ने शा'इरी की है


जिन को माना था दिल-'अज़ीज़ कभी
उन्ही अपनों ने दुश्मनी की है
ठोकरें लाख खाईं हम ने मगर
सिर्फ़ इक रब की बंदगी की है


उस हसीना के बिन जियें कैसे
टूट कर जिस से दिल-लगी की है
'इश्क़ कर के पता चला हम को
हम ने जीते जी ख़ुदकुशी की है


तुम को 'परवेज़' क्या हुआ है आज
इक हसीना से दोस्ती की है
97135 viewsghazalHindi