ये शब उन्हीं ज़ुल्फ़ों की करामात लगे है
By kaleem-aajizJanuary 3, 2024
ये शब उन्हीं ज़ुल्फ़ों की करामात लगे है
सुनते थे ग़ज़ल में ये वही रात लगे है
पत्थर की तरह तेरी हर इक बात लगे है
दिल तोड़ के नासेह तुझे क्या हात लगे है
जीना ही मोहब्बत में करामात लगे है
जी ले है जो मरना तो उसे बात लगे है
हम ने जो दिया है वो हमें जान रहे हैं
सरमाया-ए-ग़म मुफ़्त कहाँ हात लगे है
आराम कहाँ अहल-ए-वफ़ा को किसी करवट
इक आग है सीने में जो दिन-रात लगे है
औरों से मोहब्बत भी त'अल्लुक़ भी वफ़ा भी
हम से तो कभी की न मुलाक़ात लगे है
सुनते थे ग़ज़ल में ये वही रात लगे है
पत्थर की तरह तेरी हर इक बात लगे है
दिल तोड़ के नासेह तुझे क्या हात लगे है
जीना ही मोहब्बत में करामात लगे है
जी ले है जो मरना तो उसे बात लगे है
हम ने जो दिया है वो हमें जान रहे हैं
सरमाया-ए-ग़म मुफ़्त कहाँ हात लगे है
आराम कहाँ अहल-ए-वफ़ा को किसी करवट
इक आग है सीने में जो दिन-रात लगे है
औरों से मोहब्बत भी त'अल्लुक़ भी वफ़ा भी
हम से तो कभी की न मुलाक़ात लगे है
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