ये तमन्ना थी देख कर तुझ को

By ananth-faaniJanuary 2, 2024
ये तमन्ना थी देख कर तुझ को
आऊँ मैं भी कभी नज़र तुझ को
थोड़ी मेहनत के बा'द ही मिलना
ढूँढ तो लूँ इधर उधर तुझ को


दिल के हर गोशे से सदा आई
याद करता है तेरा घर तुझ को
आइना ही इक आसरा है अब
और तुझ सा मिले किधर तुझ को


कौन किस को बनाता आया है
तू बशर को या फिर बशर तुझ को
क़त्ल ही इक शिफ़ा है क्या तेरी
कौन कहता है चारागर तुझ को


45272 viewsghazalHindi