ये वक़्त का तक़ाज़ा है खुल कर जवाब दूँ

By syed-masood-naqviJanuary 5, 2024
ये वक़्त का तक़ाज़ा है खुल कर जवाब दूँ
सब साँप आस्तीन के पैरों से दाब दूँ
मुझ को चला रहा है वो अपने हिसाब से
और ये भी चाहता है कि उस को हिसाब दूँ


ख़्वाबों में कर रहा है भला कौन ये सवाल
उठ कर मैं सोचता हूँ कि किस को जवाब दूँ
हो कर मैं तेरे साथ जब आज़ाद हो गया
दुनिया के इन सवालों का अब क्या जवाब दूँ


हो जाऊँ गर ख़ुदा मैं जो इक रोज़ के लिए
जो लोग दोग़ले हैं सभी को 'अज़ाब दूँ
जो लोग मर गए हैं ज़माने में जीते-जी
जीने का उन को क्यों न हसीं कोई ख़्वाब दूँ


'मस'ऊद' मय-कदे से मैं जाने लगा था घर
इतने में साक़िया ने कहा और शराब दूँ
38409 viewsghazalHindi