यूँ मश्ग़ला-ए-सौत-ओ-सदा छूट गया है
By shehzad-anjum-burhaniJanuary 5, 2024
यूँ मश्ग़ला-ए-सौत-ओ-सदा छूट गया है
वो गोश-बर-आवाज़ जो था छूट गया है
इक बे-सर-ओ-सामान ख़मोशी है मिरे साथ
वो सिलसिला-ए-हर्फ़-ओ-नवा छूट गया है
ता-हद्द-ए-नज़र वहशत-ए-बे-नाम बिछी है
रस्ते में कहीं हम से ख़ुदा छूट गया है
अब वक़्त की चौखट पे जबीं-साई रवा है
हम से सर-ए-पिंदार-ए-अना छूट गया है
अब ख़ाक पे मक़्दूर नहीं कोई हमारा
हाथों से जो दामान-ए-हवा छूट गया है
वो गोश-बर-आवाज़ जो था छूट गया है
इक बे-सर-ओ-सामान ख़मोशी है मिरे साथ
वो सिलसिला-ए-हर्फ़-ओ-नवा छूट गया है
ता-हद्द-ए-नज़र वहशत-ए-बे-नाम बिछी है
रस्ते में कहीं हम से ख़ुदा छूट गया है
अब वक़्त की चौखट पे जबीं-साई रवा है
हम से सर-ए-पिंदार-ए-अना छूट गया है
अब ख़ाक पे मक़्दूर नहीं कोई हमारा
हाथों से जो दामान-ए-हवा छूट गया है
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