ज़माने पर 'अयाँ मेरा हुनर होने नहीं देता

By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
ज़माने पर 'अयाँ मेरा हुनर होने नहीं देता
न जाने क्यों मुझे वो मो'तबर होने नहीं देता
वो ज़ालिम अपनी यादों से सदा आबाद रखता है
मिरे टूटे हुए दिल को खंडर होने नहीं देता


ख़ुदा के फ़ज़्ल से पाई है वो एहसास की दौलत
किसी भी बात को मैं दरगुज़र होने नहीं देता
हमेशा इस अदा से वो मिरी इमदाद करता है
ज़रा भी मेरी ग़ैरत को ख़बर होने नहीं देता


कोई मौसम कोई रुत हो तसव्वुर उस के चेहरे का
किसी जल्वे को महबूब-ए-नज़र होने नहीं देता
तू मुझ से उस की यादों का असासा छीन ले यारब
ये मेरी ख़्वाहिशों को मुख़्तसर होने नहीं देता


44473 viewsghazalHindi