ज़िंदगी इक सराब-आश्ना माजरा तुम कहाँ जाओगे हम कहाँ जाएँगे

By shehzad-anjum-burhaniJanuary 5, 2024
ज़िंदगी इक सराब-आश्ना माजरा तुम कहाँ जाओगे हम कहाँ जाएँगे
मौत तक तिश्नगी का है ये सिलसिला तुम कहाँ जाओगे हम कहाँ जाएँगे
आख़िर-ए-शब की सरगोशियाँ सुन तो लो सुब्ह के बा'द है फिर वही हा-ओ-हू
उठ के इस अंजुमन से किसे है पता तुम कहाँ जाओगे हम कहाँ जाएँगे


इंतिहा-ए-कमाल-ए-सुख़न अब कहाँ इन दयारों में वो बाँकपन अब कहाँ
आज तरफ़ैन में है 'अजब फ़ासला तुम कहाँ जाओगे हम कहाँ जाएँगे
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