लोरी
By sahir-ludhianviJanuary 4, 2024
रात आ गई चमन के नज़ारे भी सो गए
नदिया को नींद आ गई धारे भी सो गए
नीले गगन के राज-दुलारे भी सो गए
सोया हुआ है चाँद सितारे भी सो गए
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
चम्पा भी सो गई है सलीमा भी सो गई
अब्बा भी महव-ए-ख़्वाब हैं आपा भी सो गई
गुड़िया की चोर कल-मुई अज़रा भी सो गई
ले अब तो तेरी नन्ही भी मैना भी सो गई
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
कल फिर सुनाऊँगी तुझे सच्ची कहानियाँ
रूस और चीन देस के लोगों की दास्ताँ
जिन की वतन-परस्त जवाँ-साल लड़कियाँ
मर्दों से बढ़ के अपने वतन की हैं पासबाँ
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
चुप-चाप और ख़मोश है हर एक रहगुज़र
पंछी भी सो रहे हैं दरख़्तों पे बे-ख़बर
अब देर हो चुकी है मिरे लाल ज़िद न कर
जाना है मदरसे तुझे कल सुब्ह वक़्त पर
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
कल सुब्ह जब मैं पास के बाज़ार जाऊँगी
'सिराज' और 'टीपू' की तस्वीर लाऊँगी
और उन की ज़िंदगी की कहानी सुनाऊँगी
तुझ को भी वैसी शान से जीना सिखाऊँगी
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
फूलों की शाहज़ादियाँ बाग़ों की रानियाँ
जाएँगी ख़्वाब में तिरे हम-राह गुल्सिताँ
और ढूँड कर तिरे लिए लाएँगी तितलियाँ
हैं तेरे इंतिज़ार में ख़्वाबों की वादियाँ
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
नदिया को नींद आ गई धारे भी सो गए
नीले गगन के राज-दुलारे भी सो गए
सोया हुआ है चाँद सितारे भी सो गए
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
चम्पा भी सो गई है सलीमा भी सो गई
अब्बा भी महव-ए-ख़्वाब हैं आपा भी सो गई
गुड़िया की चोर कल-मुई अज़रा भी सो गई
ले अब तो तेरी नन्ही भी मैना भी सो गई
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
कल फिर सुनाऊँगी तुझे सच्ची कहानियाँ
रूस और चीन देस के लोगों की दास्ताँ
जिन की वतन-परस्त जवाँ-साल लड़कियाँ
मर्दों से बढ़ के अपने वतन की हैं पासबाँ
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
चुप-चाप और ख़मोश है हर एक रहगुज़र
पंछी भी सो रहे हैं दरख़्तों पे बे-ख़बर
अब देर हो चुकी है मिरे लाल ज़िद न कर
जाना है मदरसे तुझे कल सुब्ह वक़्त पर
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
कल सुब्ह जब मैं पास के बाज़ार जाऊँगी
'सिराज' और 'टीपू' की तस्वीर लाऊँगी
और उन की ज़िंदगी की कहानी सुनाऊँगी
तुझ को भी वैसी शान से जीना सिखाऊँगी
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
फूलों की शाहज़ादियाँ बाग़ों की रानियाँ
जाएँगी ख़्वाब में तिरे हम-राह गुल्सिताँ
और ढूँड कर तिरे लिए लाएँगी तितलियाँ
हैं तेरे इंतिज़ार में ख़्वाबों की वादियाँ
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
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